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ब्लॉग्स (6)
घने जंगल मेंगर्व से खड़ा अमलताससबको चिढ़ा रहा हैसब देखते बेबसी सेजीवन में रूखापनहरीतिमा है केवलअमलतास परपीले फूलों से लदा अमलतास इतराता हैअपनी छवि परदूसरों को चिढ़ा रहा हैवह जानता है कि बहार हमेशा नहीं रहती फिर भी वह गर्वित हैअपने परकुछ दिन के बाद अमलतास ... आगे पढ़ें...

एक बार मेरे मन को पंख लग गयेमेरा मन उड़ने लगाआसमान में बहुत ऊंचामैं कुछ सोचने लगाबहुत कुछ कितना ऊंचा हूँ मैंसारी दुनिया से ऊंचाइतने में एक आत्मा गुजरीमेरे समक्षमुझे लगा कि आत्मा फिल्मों में आती हैंइतने में आत्मा फिर आ गयीमैं डर गयाआत्मा ने कहा - मैं ... आगे पढ़ें...

अगर आवश्यक समझें तो एक पत्र मुझे प्रेषित करें सवितांश भारती100/45 विश्व सम्वाद केंद्रशिवाजी नगर भोपालपिन - 462011 आगे पढ़ें...