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नव वर्ष पर भारत को ना भूलें

भारत देश में समस्त त्योहार विशेष महत्व रखते हैं , हर त्योहार के पीछे गहरा संदेश रहता है , हम जानते हैं कि हमारे सभी अच्छे कार्य भारतीय दर्शन पर आधारित होते हैं जिसका प्राकृतिक सामंजस्य भी होता है , हमारे देश में शुभ घड़ी देखने की परम्परा है हम यह भी जानते हैं वो शुभ घड़ी भारतीय पंचांग से ही निकाली जाती है ! आज तक के इतिहास में ऐसा कभी भी सुनने को नहीं मिला है कि शुभ घड़ी देखने के लिए अग्रेजी कैलेंडर का प्रयोग किया गया हों, वास्तविकता यह है कि अंग्रेजी महीना घड़ी मुहूर्त के मिलान के अनुसार नहीं चलते! वह कैसे चलते है इस बात पर गज़ब का विरोधाभास है ! भारत में हर दिन त्योहार का दिन होता है लेकिन यह सारे त्योहार भारतीय पंचांग पर आधारित होते हैं ! यह सारा खेल गृह नक्षत्रों पर मिलान के आधार पर होता है , भारत के सारे त्योहार का प्रकृति साथ देती है ! जो त्योहार प्राकृतिक तालमेल के साथ मनाये जाते हैं उनके साथ परिणाम बेहतर होते है ! एक जनवरी वाले नव वर्ष में ऐसा कोई भी प्राकृतिक संदेश नहीं होता जिससे समाज को खुशी का अहसास होता हों , वातावरण में कड़ाके की ठंड रंगीन मौसम का परिचायक नहीं है इसके विपरीत हमारे भारत के नव वर्ष पर बसंत का सुहावना मौसम होता है ! किसानों के चेहरे पर उल्लास होता है गृह नक्षत्र अनुकूल हों जाते हैं ! सबसे बड़ी बात तो यह है कि जनवरी वाले नव वर्ष पर समाज किस प्रकार की कार्यशैली अपनाता है कहीं शराब के दौर चलते हैं तो कहीं युवा वर्ग पूरी मस्ती के साथ झूमते हैं , क्या यही भारत है क्या यह भारत की संस्कृति है ! हम नव वर्ष मनाते समय अपने देश की परिपाटी का भी ध्यान रखें तो अच्छा है! सवितांश भारती


प्रतिक्रियाएँ

Re: नव वर्ष पर भारत को ना भूलें
aap ka lekh vastu parak is lekh ko aur anya website par bhi bhejiye manoj srivastava"maun" karayalya chief nav varsh chetna samiti
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